प्रकाश का आण्विक प्रकीर्णन
(नोबेल लेक्चर, 11 दिसंबर 1930) रामन प्रभाव: रामन के शब्दों में
Keywords:
- आण्विक प्रकीर्णन,
- दूधियापन,
- चुम्बकीय,
- अविनाशता सिद्धान्त
Abstract
अपने व्याख्यान में प्रो0 रामन ने बताया कि जब एकवर्णी प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है तो प्रकीर्णित प्रकाश का एक हिस्सा अपनी तरंगदैर्ध्य बदल लेता है। यह परिवर्तन पदार्थ की आंतरिक आण्विक संरचना और कम्पन अवस्थाओं से सम्बन्धित होता है। प्रकाश का प्रकीर्णन केवल प्रकाश की प्रकृति पर नहीं बल्कि उस पदार्थ की प्रकृति पर भी निर्भर करता है जिससे वह गुजरता है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रकाश के प्रकीर्णन के दौरान ऊर्जा में परिवर्तन (फोटान और परमाणुओं की अंतः क्रिया) के कारण रंग में बदलाव देखा गया। यह खोज भौतिकी में नये क्वाण्टम सिद्धान्तों के लिए महत्वपूर्ण थी। रमन प्रभाव ने पदार्थ की सरचना के अध्ययन के लिए एक शक्तिशाली तकनीक प्रदान की जो भौतिकी, रसयन विज्ञान और पदार्थ विज्ञान में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुई। इसी खोज के लिए सी वी रामन को 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया।

