नैतिक दिशानिर्देश
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जर्नल में प्रकाशन के लिए नैतिक दिशानिर्देशों के अंतर्गत लेखकों से ईमानदारी (साहित्यिक चोरी और आंकड़ों में हेरफेर न करना), मौलिक लेखन (दोहरी प्रस्तुति न करना), पारदर्शिता (किसी से हितों के टकराव की सूचना देना) और उचित आचरण (मानव/पशु अनुसंधान के लिए सूचित कर सक्षम स्तर पर सहमति प्राप्त करना और संदर्भित करना) की अपेक्षा की जाती है। संपादकों को गोपनीयता, निष्पक्षता, निष्पक्ष समीक्षा और सत्यनिष्ठा सुनिश्चित करनी चाहिए, साथ ही कदाचार की रिपोर्टों को गंभीरता से लेना चाहिए, जिसके परिणामस्वरूप सुधार, वापसी या प्रतिबंध जैसी कार्रवाई हो सकती है। |
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लेखकों के लिए |
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मौलिकता और सत्यनिष्ठा: मौलिक रचना प्रस्तुत करें; साहित्यिक चोरी, नकल या मनगढ़ंत डेटा का प्रयोग न करें। लेखकत्व: सुनिश्चित करें कि सभी योगदानकर्ताओं के नाम सूचीबद्ध हों और अनुसन्धान और लेखन में सभी लेखकों की भूमिकाओं को समझें और उचित श्रेय दें। कार्य में किसी प्रकार के सहयोग नहीं करने वालों को श्रेय देना गलत है। साथ ही साथ जिनसे सहयोग प्राप्त किया हो उनको उचित श्रेय देना अपेक्षित है। यदि सहयोग अप्रत्यक्ष है, या लेखत्व के श्रेय के लिए पर्याप्त नहीं है, तो कृपया लेख के अंत में उक्त को धन्यवाद ज्ञापित करें। डेटा और कार्यप्रणाली: डेटा, कार्यप्रणाली और संभावित पूर्वाग्रहों के बारे में पारदर्शी रहें। संदर्भ: सभी स्रोतों का सटीक रूप से उल्लेख करें और उद्धरणों/पुनर्कथनों का उचित उपयोग करें। हितों का टकराव: किसी भी वित्तीय, व्यावसायिक या व्यक्तिगत हितों के टकराव हो तो उसको स्पष्ट करें। मानव/पशु विषय: जीवित प्राणियों से संबंधित अनुसंधान के लिए सक्षम स्तर पर सूचित कर सहमति प्राप्त करें और नैतिक दिशानिर्देशों का पालन करें। एक पत्रिका में प्रेषित करना: एक ही पांडुलिपि को एक साथ कई पत्रिकाओं में जमा न करें। सुधार: प्रकाशन के बाद यदि कोई त्रुटि प्रकाश में आती है ,तो बिना किसी विलम्ब के त्रुटियों को रिपोर्ट करें। |
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संपादकों और समीक्षकों/समालोचकों के लिए |
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गोपनीयता: पांडुलिपियों को गोपनीय मानें; अप्रकाशित डेटा का उपयोग स्वयं अपने शोध के लिए न करें। |
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मुख्य नैतिक उल्लंघन (साहित्यिक कदाचार) साहित्यिक चोरी (स्वयं की साहित्यिक चोरी/पाठ पुनर्चक्रण सहित),आंकड़ों का मनगढ़ंत/गलत तरीके से प्रस्तुत करना, अनावश्यक/दोहरा प्रकाशन कदाचार की श्रेणी में आता है। |

