आलेखों का वर्गीकरण

लघु, सामान्य, विशेष एवं आमंत्रित आलेखों  को व्यवस्थित रूप से निम्न भागों में लिख सकते हैं:

लघु आलेखों को सामान्यतः चार मुख्य भागों में विभक्त कर सकते हैं:

१: शीर्षक (Title)
इसे अधिकतम २० शब्दों में लिखना चाहिए जो मुख्य विषय को प्रतिबिंबित/रेखांकित करता हो।  शीर्षक को हिंदी के बाद अंग्रेजी भाषा में लिखें।  

२: सारांश (Abstract)
यह  विषय के मुख्य बिंदुओं या संक्षिप्त प्रस्तुति को दर्शाता है।  इसे आलेख के १० प्रतिशत से कम शब्दों में व्यक्त करें। सारांश को हिंदी के बाद अंग्रेजी भाषा में लिखें।

अपने सारांश की संरचना एक तार्किक क्रम में व्यवस्थित करें।
पृष्ठभूमि/उद्देश्य: सामान्यतः:विषय और शोध संबंधी कमी/समस्या का संक्षिप्त परिचय दें।
विधि: अपनी कार्यप्रणाली और आपने क्या किया, इसका वर्णन करें।
परिणाम: अपने मुख्य निष्कर्षों को स्पष्ट रूप से बताएं, यदि संभव हो तो विशिष्ट डेटा का उपयोग करें।
निष्कर्ष/प्रभाव: अपने कार्य के महत्व और योगदान का संक्षेप में वर्णन करें।

३: भूमिका / प्रस्तावना (Introduction)
इसमें विषय का संक्षिप्त परिचय दिया जाता है। इसके अंतर्गत लेखक से यह जानकारी देने की अपेक्षा की जाती है, कि निबंध किस विषय पर है, और इसे लिखने के पीछे उसका उद्देश्य क्या है? इसमें पूर्व से उपलब्ध जानकारी की समीक्षा करना भी सम्मलित है। 

४. मुख्य भाग /विवेचना  (Main Body)
यह निबंध का विस्तृत भाग होता है और इसमें विषय से संबंधित तथ्य, तर्क, उदाहरण और विचार क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किए जाते हैं। लेखक अपनी आवश्यकता अनुसार  इसे कई अनुच्छेदों में बाँटा सकते हैं।

५: निष्कर्ष/ उपसंहार (Conclusion )
लेखकों को इसमें पूरे निबंध का सार प्रस्तुत करना चाहिए। लेखक को अपने विचारों को संक्षेप में सार के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए और कभी-कभी किसी समस्या के समाधान, कुछ संदेश या तार्किक सम्भावना व्यक्त करते हुए समाप्त करना उचित है।

सामान्य, विशेष या निमंत्रित आलेखों को उसे निम्न भागों में विभक्त कर प्रस्तुत किया जा सकता है:

१. शीर्षक (Title)
इसे अधिकतम २० शब्दों में लिखना चाहिए जो मुख्य विषय को प्रतिबिंबित/रेखांकित करता हो।  शीर्षक को हिंदी के बाद अंग्रेजी भाषा में लिखें।  

२: सारांश (Abstract)
यह  विषय के मुख्य बिंदुओं या संक्षिप्त प्रस्तुति को दर्शाता है।  इसे आलेख के १० प्रतिशत से कम शब्दों में व्यक्त करें।  सारांश को हिंदी के बाद अंग्रेजी भाषा में लिखें।

अपने सारांश की संरचना एक तार्किक क्रम में व्यवस्थित करें।
पृष्ठभूमि/उद्देश्य: सामान्यतः:विषय और शोध संबंधी कमी/समस्या का संक्षिप्त परिचय दें।
विधि: अपनी कार्यप्रणाली और आपने क्या किया, इसका वर्णन करें।
परिणाम: अपने मुख्य निष्कर्षों को स्पष्ट रूप से बताएं, यदि संभव हो तो विशिष्ट डेटा का उपयोग करें।
निष्कर्ष/प्रभाव: अपने कार्य के महत्व और योगदान का संक्षेप में वर्णन करें।

३: भूमिका / प्रस्तावना (Introduction)
इसमें लेखक को विषय का प्रारंभिक परिचय देते हुए सभी पाठकों की रूचि जगाने का कार्य करना चाहिए। इसमें विषय का संक्षिप्त परिचय दिया जाता है। इसके अंतर्गत लेखक से यह जानकारी देने की अपेक्षा की जाती है, कि निबंध किस विषय पर है, और इसे लिखने के पीछे उसका उद्देश्य क्या है? इसमें पूर्व से उपलब्ध जानकारी की समीक्षा करना भी सम्मलित है। 

४: विवेचना /मुख्य भाग  (Discussion/Explanation)
यह निबंध का विस्तृत भाग होता है और इसमें विषय से संबंधित तथ्य, तर्क, उदाहरण और विचार क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किए जाते हैं। लेखक अपनी आवश्यकता अनुसार  इसे कई अनुच्छेदों में बाँटा सकते हैं।यह निबंध का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें लेखक को निम्न को व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करने की अपेक्षा की जाती है।  

विषय का विवरण – विषय की व्याख्या
तथ्य और आंकड़े, चित्र (ग्राफ़िक्स) – प्रमाण के लिए
तर्क और उदाहरण – विचारों को मजबूत करने के लिए
लाभ–हानि / पक्ष–विपक्ष (यदि आवश्यक हो)
समस्याएँ और समाधान (विषय के अनुसार)

५: विश्लेषण / विचार प्रस्तुति (Analysis  and Opinion )
इसके अंतर्गत लेखक को अपने विषय पर गहन चिंतन कर विषय पर अपने विचार समालोचनात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करने चाहिए। 

६:. निष्कर्ष/ उपसंहार (Conclusion )
लेखकों को इसमें पूरे निबंध का सार प्रस्तुत करना चाहिए। लेखक को अपने विचारों को संक्षेप में सार के रूप में प्रस्तुत करना चाहिए और कभी-कभी किसी समस्या के समाधान, कुछ सुझाव, संदेश, तार्किक सम्भावना या भविष्य की दिशा व्यक्त करते हुए समाप्त करना उचित है।

७: संदेश / सुझाव (यदि आवश्यक हो) (Suggestions if any)
लेखक इसमें समाज, पाठक या सरकार के लिए सुझाव, नैतिक या प्रेरणादायक संदेश लिख सकते हैं।